#प्यार_समर्पण_होता_है #DrNupurGoel #Chetna_poem
प्यार समर्पण होता है प्यार तो छीनने का नाम नहीं , प्यार तो खुद को लुटाने का है नाम , प्यार तो लुट जाने का है नाम | जिससे प्यार करते हो , कैसे उस पर तेजाब फेकते हो | प्यार का दावा करते हो और , मुंह पर तेजाब फेंक देते हो | मना करने पर रेप कर देते हो , ऐसा कैसा प्यार तुम करते हो | प्यार में तो समर्पण होता है , जबरदस्ती हाय तुम कैसे करते हो | डराते हो धमकाते हो , मार पीट तक कर डालते हो | प्यार में तो हाथ में फूल होता है , हाय तेजाब तलवार कहां से लाते हो | यह प्यार नहीं यह तो ज़िद है , यह प्यार नहीं यह तो हवस है | प्यार में तुम सिर्फ मेरे हो/ मेरी हो नहीं होता , प्यार में मैं सिर्फ तुम्हारा/ तुम्हारी हूं ही होता है | प्यार में दूसरों को बदला नहीं जाता , वह जैसा है वैसे ही स्वीकार किया जाता है , सब गुण दोषों के साथ अंगीकार किया जाता है | प्यार में दूसरे को बदलने की भावना नहीं होती , प्यार में तो खुद को बदलने का एहसास होता है। Dr Nupur Goel/Chetna