#औरतजात_बदनाम-हो-गईpoem #DrNupurGoel #chetna_poem
औरतजात बदनाम हो गई
एक लड़की घर से क्या भाग गई, सारी औरतजात बदनाम हो गई।
एक लड़के ने बलात्कार किया, फिर भी औरतजात ही बदनाम हो गई।
कहते हैं.
लड़की घर से भाग जाती है, लड़की हम पैदा ना करेंगे।
लड़की का बलात्कार हो जाता है, लड़की हम पैदा न करेंगे।
पर कोई नहीं कहता,
लड़के लड़कीयां भगाते है, लड़का हम पैदा ना करेंगे।
लड़के बलात्कार करते हैं. लड़का हम पैदा ना
करेंगे।
लड़के तो गद्दी के लिए बाप का कत्ल भी कर दे,
फिर भी,
हम लड़का पैदा करेंगे, लड़का पैदा करेंगे, लड़का पैदा करेंगे।
कोई नहीं कहता,
पैसे चोरी हो जाते है , पैसा हम पैदा न करेंगे ,
जमीन जायदाद के लिए कत्ल हो जाते है , जमीन जायदाद हम इक्कठा न करेंगे ,
पैसो के लिए जेल भी हो जाए
फिर भी ,
येन केन प्रक्रेण पैसा हम पैदा करेंगे , पैसा हम पैदा करेंगे , पैसा हम पैदा करेंगे |
भाई ने नशेड़ी से दोस्ती की, तो ठीक था,
पर,
बहन ने उसी नशेड़ी से शादी की, तुम गलत हो गई।
बाप ने गुंडे पाले, बेटी की शादी मानने से इनकार किया, तो कोई बात नहीं
पर,
बेटी ने अपनी अपने पति की जिंदगी मांगी तो गलत हो
गई।
फिर कैसे,
समाज के सारे गुंडे, नशेड़ीयों की अरेंज मैरिज हो गई।
और कैसे,
उन लड़कियों के मां बाप गलत नहीं समझे गए।
कैसे वो मां बाप सही हो गये जो अपनी बेटियों की
शादी जबरदस्ती
उनसे कई साल बड़े लड़के, नशेड़ी, शराबी,
जुवारी, गुंडे से करवा गए।
कैसे वो समाज,
गलत नहीं माना गया जो ऐसी शादियों में जाके,
नाचकर, स्वादिष्ट भोजन खाकर,
शराब पीकर घर आ गया ?
पिक्चरों और सीरियलस में गरीब लड़का-अमीर लड़की
या अमीर लड़का
गरीब लड़की
अलग-अलग जाति के लड़का लड़की
या
किसी भी तरह से लड़का लड़की का प्यार बड़ा सुहाता
है,
और
उनको जो अलग करें बड़ा कमीना लगता है,
पर्दे पर देख देख उसे सौ सौ गालियां देते हैं ,
और असल जिंदगी में उसी पर पंचायते करते हैं,
हाई कोर्ट के बाहर उनकी पिटाई करते हैं,
पर किसी बलात्कारी का केस आए तो लंबी लंबी फीस ले,
उसके साथ हंस हंस के बात करते है |
पुराना जमाना सबको बड़ा अच्छा लगता है
कहते हैं पुराने जमाने में लड़कियां सुरक्षित थी
क्योंकि उस समय वह अश्लील वस्त्र नहीं पहनती थी,
क्या उस वक्त के वस्त्र पेट से खुले नहीं होते थे,
क्या उस वक्त घुटने तक के घागरे नहीं होते थे,
क्या उस वक्त घर में ही बलात्कार नहीं होते थे,
क्या उस वक्त आश्रित होने के कारण लड़कियां सब
सहने को विवश नहीं होती थी?
उस समय संचार माध्यम और जागरूकता की कमी के कारण,
ऐसी बातें पता नहीं चलती थी, सौ होती थी तो एक ही खुलती थी|
उस पर भी सारा दोष लड़की पर उसके परिवार पर होता
था,
लड़का तो सांड की तरह सीना तान के घूमता था|
औरतों को ही स्तन कर देना होता था, औरतों के ही वैश्यालय खुलते थे,
औरतें ही बदनाम होती थी, औरतें ही हिकारत की नजरों से
देखी जाती थी|
पर उन वेश्यालय में जाने वाला पुरुष समाज,
पर उन स्तनो को देखने वाला पुरुष समाज,
पर उन नग्न औरतों को देखने वाला पुरुष समाज,
कैसे संभ्रांत ही रह जाता था???
औरत ने जारता की तो अब उसे नग्न कर पूरे गांव में
घुमाओ,
एक के साथ कैसे की
सारे गांव के पुरुषों को उसका शरीर दिखाओ,
आज की नारी गर बोलने लगी है तो हाय समाज का पतन
हो गया
आज की नारी अपनी मर्जी से कपड़े पहनने लगी है तो हाय
समाज का पतन हो गया
कोई उसको गलत नजरों से देखे तो विरोध करने लगी, तो हाय कम कपड़ों का दोष हो गया|
सानिया
मिर्ज़ा देश के लिए खेलने के ऊंचे कपड़े पहने तो एतराज हो गया ,
पर
सलमान
ने शर्ट उतारी ,
सलमान
ने सिक्स पैक्स दिखाये
सलमान
ने अपना शरीर नंगा किया
तो
कोई आवाज़ ना आई
क्यो
??
कैसे
लिंग का ये भेद तुम करते हो ?
कैसे
हर वक़्त लड़कियो को दोयम दर्जे पर तुम रखते हो ???
डॉ नूपुर गोयल/ चेतना
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